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ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की नई पहल : ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम का शुभारंभ आज

संदिली सिंह,रायपुर,30अगस्त2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा,कि सुशासन का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होगा जब ग्रामीण महिलाएँ सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक रूप से सशक्त बनें। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की हैं।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत,तैयार विशेष रेडियो कार्यक्रम “दीदी के गोठ” का शुभारंभ 31 अगस्त 2025 को दोपहर 12:15 बजे होगा। यह कार्यक्रम आकाशवाणी रायपुर केंद्र सहित प्रदेश के सभी, आकाशवाणी केंद्रों से एक साथ प्रसारित किया जाएगा। इसके साथ ही,इसकी लाइव स्ट्रीमिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (www.onlineradiofm.in/stations/all-india-air-raipur) पर भी उपलब्ध रहेगी।

🟠मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री का संदेश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय,भारत सरकार के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ग्रामीण महिलाओं को विशेष संदेश और शुभकामनाएँ देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा,कि “दीदी के गोठ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं हैं,बल्कि यह सरकार की दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब हैं,जिसका उद्देश्य महिलाओं की आवाज़ को समाज तक पहुँचाना और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़कर सकारात्मक बदलाव की राह दिखाना हैं।”

🟠आत्मनिर्भरता की राह पर “लखपति दीदियाँ”

‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी,उन सफल महिलाओं की कहानियाँ सुनाई जाएंगी जिन्होंने कठिनाइयों को पार कर अपने आत्मविश्वास और मेहनत से न केवल आर्थिक मजबूती हासिल की,बल्कि समाज में भी नई पहचान बनाई।

आज छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं,और उनका जीवन बिहान योजना से पूरी तरह बदल गया हैं। इन प्रेरणादायी कहानियों को रेडियो की आवाज़ के माध्यम से हर गाँव और हर घर तक पहुँचाया जाएगा, ताकि अन्य महिलाएँ भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकें।

🟠सामूहिक श्रवण की होगी व्यवस्था

कार्यक्रम की पहुँच और प्रभाव को और व्यापक बनाने के लिए पंचायत,ग्राम संगठन और संकुल संगठन स्तर पर सामूहिक श्रवण की व्यवस्था की गई हैं।इसमें जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय समुदाय और स्व-सहायता समूह की महिलाएँ शामिल होंगी।

सामूहिक श्रवण से गाँवों में संवाद, चर्चा और प्रेरणा का वातावरण बनेगा तथा महिलाएँ शासन की योजनाओं और अवसरों से सीधे जुड़ पाएंगी।

 

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