संदिली सिंह,सरगुजा,11सितंबर2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़, जिसे नैनीहाल के नाम से भी जाना जाता हैं,और जहां कालिदास जी ने मेघदूत की रचना की थी,अब अस्तित्व संकट का सामना कर रहा हैं। यह पहाड़ सिर्फ प्राकृतिक धरोहर नहीं बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का प्रतीक भी हैं।
स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों के अनुसार,अदानी द्वारा संचालित परसा ईस्ट केते बासेन कोल माइंस के ब्लास्ट से पहाड़ों में लगातार दरारें पड़ रही हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाज़ी तेज़ हो गई हैं। पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस धरोहर के संरक्षण की मांग की थी, जिससे राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ गईं।
छत्तीसगढ़ के पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्री व स्थानीय विधायक राजेश अग्रवाल ने बताया,कि इस खतरे का अध्ययन करने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई हैं। टीम खदान गतिविधियों के प्रभाव की जांच कर प्रतिवेदन सौंपेगी। मंत्री ने कहा,कि यदि उत्खनन से किसी भी प्रकार की क्षति पहाड़ को पहुंचती हैं, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया,कि रामगढ़ पहाड़ की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए यह लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी समस्या से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार हैं।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने याद दिलाया,कि वे पिछले 50 वर्षों से रामगढ़ में आयोजित भंडारे और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते आए हैं ,और इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं।












