संदिली सिंह,सारंगढ़,13सितंबर2025,विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ वन विभाग की उड़नदस्ता दल और वन परिक्षेत्राधिकारियों की संयुक्त टीम ने छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1984 की धारा 12 (ख) के अंतर्गत विशेष जांच अभियान चलाया। इस कार्रवाई में सारंगढ़-बिलाईगढ़ वनमंडल क्षेत्र के तीन आरामिलों पर छापा मारकर अवैध संचालन पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कर सील कर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान गोड़म स्थित लक्ष्मी सॉ मिल का संचालन स्वामी रामलाल यादव की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों द्वारा किया जा रहा था,जबकि मिल का नवीनीकरण समाप्त हो चुका था। इसी तरह पटेल सॉ मिल गोडम को भी स्वामी गणेशलाल पटेल के निधन के बाद उनके परिजनों द्वारा बिना वैध अनुमति के चालू रखा गया था। वहीं, तोषराम पटेल आरामिल ग्राम अमलीपाली (बरमकेला) में निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मिल बिना किसी वैध लाइसेंस के अवैध रूप से चलाई जा रही थी।इस कार्रवाई में छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 की धारा 6 (5) ग, 9, 12 (ख) और 12 (ड) का उल्लंघन पाया गया।
🟠आरामिल संचालन और कानूनी प्रावधान
छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1984 के अनुसार, किसी भी आरामिल का संचालन तभी वैध हैं,जब उसके पास निर्धारित शर्तों के तहत वैध लाइसेंस और समय-समय पर नवीनीकरण की अनुमति हो। अधिनियम की संबंधित धाराएँ अवैध संचालन पाए जाने पर विभाग को तत्काल कार्रवाई का अधिकार देती हैं।
🟠वन विभाग का सख्त रुख
वनमंडलाधिकारी सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने कहा,कि प्रदेश में अवैध आरामिल संचालन और अवैध लकड़ी कारोबार पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग ने आम जनता और आरामिल संचालकों से अपील की हैं,कि वे केवल वैध अनुमति और नवीनीकरण के बाद ही मिलों का संचालन करें, अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।












