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हिमालय की ऊँचाइयों पर गूंजा जशपुर : आदिवासी युवाओं ने खोला नया ‘विष्णु देव रूट’, रचा नया इतिहास

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़/31अक्टूबर2025/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं ने वह कर दिखाया जो,अब तक सिर्फ सपनों में था। हिमाचल प्रदेश की दुहंगन घाटी (मनाली) की बर्फीली ऊँचाइयों पर इन युवाओं ने 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया पर्वतारोहण मार्ग (रूट) खोला हैं — जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया हैं।

यह सिर्फ एक चढ़ाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकली अदम्य इच्छाशक्ति की कहानी हैं। युवाओं ने बेस कैंप से मात्र 12 घंटे में आल्पाइन शैली में चढ़ाई पूरी की — बिना फिक्स रोप, बिना सपोर्ट टीम — पूरी तरह आत्मनिर्भरता के साथ।🟠आदिवासी युवाओं की ऐतिहासिक उपलब्धि

इस अभियान में शामिल सभी पर्वतारोही पहली बार हिमालय पहुंचे थे। लेकिन जशपुर के “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में मिले प्रशिक्षण ने इन्हें हिमालय फतह करने का हौसला दिया। यह भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर प्रशिक्षण क्षेत्र हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया हैं।

अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया। साथ में थे — राहुल ओगरा, हर्ष ठाकुर, रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक।टीम को तकनीकी मार्गदर्शन अमेरिका के डेव गेट्स, स्पेन के टोती वेल्स और भारत के अनुभवी प्रशिक्षकों ने दिया।

🟠दुनिया ने सराहा “विष्णु देव रूट”

स्पेन के वर्ल्ड कप कोच रह चुके पर्वतारोही टोती वेल्स ने कहा —

“इन युवाओं ने जो किया, वह केवल पर्वतारोहण नहीं, बल्कि इतिहास हैं। जिन्होंने कभी बर्फ नहीं देखी, उन्होंने हिमालय पर नया रास्ता बनाया — यह भारत के लिए गर्व की बात हैं।”🟠प्रेरक पहल बनी नई पहचान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की असली शक्ति बताया —

“भारत का भविष्य गाँवों और आदिवासी युवाओं की मेहनत और सपनों में बसता हैं। जशपुर ने साबित कर दिया,कि सही दिशा और अवसर मिलें तो कोई ऊँचाई दूर नहीं।”

🟠नई संभावनाओं की ओर जशपुर

“विष्णु देव रूट” के साथ ही टीम ने दुहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स खोले। इनमें “छुपा रुस्तम पीक (5,350 मीटर)” और उसका मार्ग “कुर्कुमा” (हल्दी का वैज्ञानिक नाम) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।🟠यह अभियान सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि संदेश हैं 

भारत के गाँवों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही निकल सकते हैं।

अब जशपुर को एडवेंचर और इको-टूरिज़्म के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेज़ी से कार्य हो रहा हैं।

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