Nexis News

‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’अभियान की ऐतिहासिक सफलता : 48 घंटे में 81नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,15जनवरी2026/ विशेष रिपोर्ट-Nexis News

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे, निर्णायक अभियान को एक ऐतिहासिक सफलता मिली हैं। राज्य सरकार की स्पष्ट नीति,सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और विकास आधारित दृष्टिकोण के चलते ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के अंतर्गत बीते 48 घंटों में कुल 81 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा को अपनाया हैं।

 🟠‘पूना मारगेम’ के तहत बड़ा आत्मसमर्पण

आधिकारिक जानकारी के अनुसार,‘पूना मारगेम’ अभियान के अंतर्गत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े, 52 सक्रिय माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया हैं। इन सभी पर कुल ₹1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इतनी बड़ी संख्या में इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा हैं।

🟠मुख्यमंत्री का सख्त और स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को हिंसक विचारधारा पर विश्वास और विकास की निर्णायक जीत बताया। उन्होंने कहा—

“बीते 48 घंटों में 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं,कि माओवाद अब केवल कमजोर नहीं पड़ा हैं,बल्कि पूरी तरह बिखर रहा हैं। बंदूक के नहीं,विकास के साथ ही भविष्य सुरक्षित हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा,कि बस्तर अंचल में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी विकृत विचारधारा और पूरा सपोर्ट सिस्टम भी ध्वस्त हो चुका हैं। जहाँ कभी भय, भ्रम और दबाव का वातावरण था,वहाँ अब शासन की मजबूत उपस्थिति,सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास योजनाओं की प्रभावी पहुँच से जनता का भरोसा बढ़ा हैं।

🟠सम्मानजनक जीवन की ओर लौटते भटके युवा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया,कि ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत सरकार हिंसा छोड़ने वाले युवाओं को सुरक्षा, सम्मान, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। इसी भरोसे के चलते बड़ी संख्या में नक्सली अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

🟠नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ कदम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा,कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,कि छत्तीसगढ़ में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं हैं। बस्तर में अब भय की जगह भविष्य आकार ले रहा हैं—जहाँ सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ, रोजगार और शासन की पहुँच निरंतर मजबूत हो रही हैं।

🟠निष्कर्ष:

यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा की जीत हैं, बल्कि यह भरोसे,विकास और लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक भी हैं।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें

error: Content is protected !!