संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,28जनवरी2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था आज सिर्फ अनाज की खरीद नहीं, बल्कि गांव-गांव में भरोसे, सम्मान और आत्मविश्वास की नई कहानी लिख रही हैं। इसी व्यवस्था की बदौलत धमतरी जिले के ग्राम संबलपुर की महिला किसान चौती बाई साहू की ज़िंदगी ने नया मोड़ लिया हैं।अब तक परिवार में धान बेचने की जिम्मेदारी उनके पति निभाते थे, लेकिन इस वर्ष स्वास्थ्य कारणों से चौती बाई ने खुद यह दायित्व संभाला। यह उनके लिए केवल धान विक्रय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की पहली मजबूत उड़ान थी। तय तिथि पर जारी टोकन के अनुसार वे 57 क्विंटल धान लेकर खरीदी केंद्र पहुँचीं।
पहली बार इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने के बावजूद उनके चेहरे पर घबराहट नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और संतोष साफ नजर आ रहा था। चौती बाई बताती हैं,कि खरीदी केंद्र की पारदर्शी, सुव्यवस्थित और किसान-मैत्री व्यवस्था ने पूरे अनुभव को आसान बना दिया।केंद्र में बारदाना, हमाल, डिजिटल तौल मशीन, प्रशिक्षित ऑपरेटर, पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी सभी मूलभूत सुविधाएँ मौजूद थीं। किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं, न ही अनावश्यक इंतज़ार—हर किसान को सम्मान के साथ सेवा मिली।
धान विक्रय से मिली राशि से चौती बाई अपने पति का बेहतर इलाज कराने की तैयारी कर रही हैं। सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का फैसला किसानों के लिए संजीवनी साबित हुआ हैं।
बढ़े हुए समर्थन मूल्य से उनके परिवार के जीवन में स्थिरता आई हैं। अब घर के खर्च, इलाज और भविष्य की जरूरतों को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं सताती। चौती बाई ने खरीदी केंद्र के कर्मचारियों, हमालों और प्रशासनिक अमले की संवेदनशीलता और सहयोग की खुले दिल से सराहना की।
चौती बाई की कहानी सिर्फ एक महिला किसान की सफलता नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण हैं,कि जब नीतियाँ ज़मीन पर असर दिखाती हैं, तो अंतिम पंक्ति में खड़ा किसान भी सशक्त बनता हैं। आज संबलपुर की चौती बाई केवल धान बेचने वाली किसान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की किसान-केंद्रित नीतियों की जीवंत पहचान बन चुकी हैं।












