संदिली सिंह,नई दिल्ली,29जनवरी2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के लिए,लाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने इन नियमों को “अस्पष्ट” और “दुरुपयोग की संभावना” वाला बताते हुए,इन्हें फिलहाल स्थगित (Abeyance) रखने का आदेश दिया हैं।
🟠क्या हैं,पूरा विवाद?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को नए ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ अधिसूचित किए थे। इन नियमों में ‘जातिगत भेदभाव’ की जो परिभाषा दी गई थी, उसे लेकर विवाद खड़ा हो गया। नए नियमों के अनुसार, जातिगत भेदभाव केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के साथ होने वाले व्यवहार तक सीमित था।
🟠सुप्रीम कोर्ट में चुनौती क्यों दी गई?
अधिवक्ता विनीत जिंदल और अन्य याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया,कि यह परिभाषा “भेदभावपूर्ण” हैं,क्योंकि यह सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों को सुरक्षा के दायरे से बाहर रखती हैं। याचिका में कहा गया,कि भेदभाव किसी के साथ भी हो सकता हैं, इसलिए नियम ‘जाति-तटस्थ’ (Caste-neutral) होने चाहिए।
🟠कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
🔸️पुराने नियम बहाल: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया,कि जब तक इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे।
🔸️समाज को बांटने का खतरा : अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,कि शैक्षणिक संस्थानों को भारत की एकता का प्रतीक होना चाहिए, न कि ऐसी जगह जहां छात्र जातियों के आधार पर विभाजित महसूस करें।
🔸️विशेष समिति का सुझाव : CJI ने केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल को सुझाव दिया,कि प्रख्यात न्यायविदों और विद्वानों की एक समिति बनाई जाए जो सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए बेहतर दिशा-निर्देश तैयार कर सके।
🟠अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की गई हैं। तब तक नए नियमों के तहत कोई भी कार्रवाई या बदलाव नहीं किया जा सकेगा।












