बस्तर की बदलती तस्वीर : आकांक्षी जिला से “बस्तर ओलंपिक” तक का सफर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में की सराहना

संदिली सिंह,रायपुर,छत्तीसगढ़,5फरवरी 2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने उद्बोधन के दौरान बस्तर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा,कि जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला माना जाता था,आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक” के नाम से जाना जा रहा हैं। उन्होंने कहा,कि विकास की धारा अब बस्तर के गांव-गांव तक पहुंच रही हैं,और कई गांवों में पहली बार बस सेवा शुरू होने पर पूरे गांव ने इसे उत्सव के रूप में मनाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,कि एक समय ऐसा भी था जब कुछ क्षेत्रों को पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया था। वहां के लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं तक को नजरअंदाज कर दिया गया और इन जिलों को “पनिशमेंट पोस्टिंग” के रूप में देखा जाने लगा। उन्होंने कहा कि इस सोच को बदला गया और पिछड़े क्षेत्रों में योग्य, युवा और सक्षम अधिकारियों को तैनात कर उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया गया। आज इसके सकारात्मक परिणाम पूरे देश के सामने हैं। प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर छत्तीसगढ़ का सौभाग्य हैं। प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध यह क्षेत्र धरती का स्वर्ग कहा जा सकता हैं,जहां कुटुमसर जैसी विश्वविख्यात गुफा,अबूझमाड़ का विशाल वन क्षेत्र, अनेक जलप्रपात और धुड़मारास जैसे विश्व पर्यटन संगठन द्वारा चयनित ग्राम स्थित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा,कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास से वंचित रहा, जबकि इसका क्षेत्रफल केरल राज्य से भी बड़ा हैं। अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर हैं,और विकास ने नई गति पकड़ी है।उन्होंने बताया कि इसी बदले हुए माहौल का परिणाम हैं,कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन हो रहे हैं। पिछले वर्ष बस्तर ओलंपिक में 1 करोड़ 65 लाख युवाओं की भागीदारी रही, जो इस वर्ष बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई हैं।

मुख्यमंत्री साय ने बताया,कि संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होगा।मुख्यमंत्री ने कहा,कि बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं का प्रतीक बन रहा हैं। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि यदि नीति, नीयत और नेतृत्व सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता हैं।

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