संदिली सिंह,जशपुर,छत्तीसगढ़,18फरवरी 2026/विशेष रिपोर्ट-Nexis News
कृषि विज्ञान केंद्र (केव्हीके) कर्मचारियों की पाँच दिवसीय कामबंद हड़ताल के तीसरे दिन आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया। छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी कल्याण संघ के बैनर तले जारी धरना उस समय चर्चा में आ गया,जब इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया गया।पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों को गेट के बाहर बैठकर धरना देना पड़ा।
🟠शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच ताला बंदी
संघ पदाधिकारियों का आरोप हैं,कि वे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन प्रशासन ने भवन में ताला बंद कर आंदोलन को बाधित करने का प्रयास किया।तेज धूप और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कर्मचारी पूरे अनुशासन के साथ गेट के बाहर धरने पर डटे रहे। कर्मचारियों का कहना हैं।
“हम संवाद चाहते हैं, दमन नहीं।”
🟠18 माह से वेतन-भत्तों का संकट
कर्मचारियों के अनुसार, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी और कर्मचारी विश्वविद्यालय की होस्ट संस्था के अधीन कार्यरत हैं, इसलिए वेतन, वैधानिक भत्तों और सेवा-लाभों की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की हैं।
🟠संघ का कहना हैं
पिछले 18 माह से पूर्ण वेतन और भत्तों का भुगतान नहीं हुआ।आर्थिक असुरक्षा के कारण परिवारों पर गंभीर असर पड़ रहा हैं।बच्चों की पढ़ाई और दैनिक खर्च चलाना कठिन हो गया हैं।लगातार मानसिक तनाव बढ़ रहा हैं।
🟠“लिखित समाधान दो, नहीं तो आंदोलन होगा तेज”
धरना स्थल से संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी हैं,कि यदि मांगों पर लिखित और समयबद्ध समाधान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।संघ ने दोहराया कि उनका संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं और यह कर्मचारी अधिकारों की रक्षा के लिए हैं। तीसरे दिन की ताला बंदी की घटना ने आंदोलन को और गरमा दिया हैं। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।












